हरियाणवी भजन

    पर उपकार हरि की भगती, करने वाले करेगे भजन पर उपकार को | Bhajan Lyrics

    पर उपकार हरि की भगती, करने वाले करेगे भजन पर उपकार को | Bhajan Lyrics

    📿 भजन पर उपकार को | Bhajan Lyrics

    Published on: 27 अप्रैल 2025
    Category: भक्ति संगीत | हरि भजन


    "भजन पर उपकार को" एक अत्यंत प्रेरणादायक भजन है, जो बताता है कि सच्चे भक्ति मार्ग पर चलने वाले कैसे केवल स्वयं का ही नहीं, बल्कि समस्त संसार का कल्याण करते हैं। यह भजन हमें इतिहास की उन महान विभूतियों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने प्रेम, त्याग और भक्ति से अमरता प्राप्त की।


    प्रेरणादायक दोहे (Dohe)

    भजन बिना मन सूना, करे जो गान हरि नाम।
    मिटे विकार विकट सभी, खुले मोक्ष के धाम।।

    हरि भक्ति है दीप समान, जो अंतर्मन को रौशन करे।
    साधु संगति, प्रेम रस पान, भवसागर से पार करे।।

    सच्चे मन से हरि भजे, हो सब संकट दूर।
    प्रेम पगे चरणों तले, मिल जाए अमरता सूर।।

     

    भजन पर उपकार को | Lyrics

    भजन पर उपकार को

    पर उपकार हरि की भगती, करने वाले करेगे।
    अभिमानी उत्पात मचाके, मरने वाले मरेगे ।।टेर।।

    असुरों ने उत्पात किया जब, सन्त देवता डरेगे ।
    अमर नाम दुनियां में अपना ऋषि दधीची करेगे ।।
    परहित में निज प्राण त्याग के, नाम जगत में धरेगे ।
    सकल देवता खुशी हुए जब, खल उत्पाती  मरेगे ।।
    सत्य धर्म की नींव जगत है,  धरने वाले धरगे ।।1।।

    बांध घुंघरा गिरधर आगे, नाची मीरां बाई।
    प्रेम मगर मनवाली होगी, तन की सुध बिसराई।।
    राणा विष का प्याला भेज्या, मन में कर कुटलाई ।
    अमृत कर के मीरां पी गई, गिरधर के मन भाई।।
    भगत जगत में पार हुए, दुःख भरने वाले भरगे ।।2।।

    खोटी बात बिचारी मन में, दुर्योधन अभिमानी ।
    भरी सभा में द्रुपद सुता को , नंगन करन की ठानी ।।
    सच्चे मान से याद किया, कर जोड़ द्रोपती रानी |
    भरी सभा में लाज बचाई, सुनी भगत की बानी ।।
    राम भजे सो पार उतरगे, डरने वाले डरगे।।3।।

    शिशपाला सर बाँध सेहरा चाल पड्या कुलघाती।
    कुंदनापुर में डेरा दिनया, ले के साथ बराती।।
    जादू बंश देख के आगे, फाट गई छाती ।
    कुन्दनापुर में हुई लड़ाई, भाग चले उत्पाती।।
    हरनारायण हरि गुण गा के, तिरने वाले तिरगे ।।4।।


    भजन सारांश (Bhajan Saransh)

    यह भजन सिखाता है कि:

    • हरि की भक्ति केवल स्वयं का उद्धार नहीं करती, बल्कि संसार पर भी उपकार करती है।

    • ऋषि दधीची ने अपने प्राण त्यागकर देवताओं की रक्षा की, जिससे उनका नाम अमर हुआ।

    • मीराबाई ने विष का प्याला भी प्रेम में अमृत बना दिया — गिरधर के प्रति अखंड भक्ति से।

    • द्रौपदी ने अपमान की घड़ी में कृष्ण का आह्वान किया, और उनकी लाज बचाई गई।

    • शिशुपाल जैसे अधर्मी अंततः विनाश को प्राप्त होते हैं, जबकि भगवान का गुणगान करने वाले भवसागर से पार उतरते हैं।

    संदेश:
    भजन और भक्ति से मनुष्य न केवल अपने दुखों से मुक्ति पाता है, बल्कि धर्म की स्थापना में भी सहायक होता है।


    FAQs

    Q1. "भजन पर उपकार को" भजन का मुख्य संदेश क्या है?
    Ans: यह भजन बताता है कि हरि भक्ति करने वाले अपने जीवन को सार्थक बनाते हैं और संसार पर भी उपकार करते हैं।

    Q2. भजन में मीराबाई और द्रौपदी का उल्लेख क्यों किया गया है?
    Ans: मीराबाई और द्रौपदी दोनों ने कठिन परिस्थितियों में भी हरि भक्ति का सहारा लिया और अपने जीवन में विजय पाई।

    Q3. भजन गाने का सर्वोत्तम समय कब है?
    Ans: प्रातःकाल और संध्या समय भजन गाना विशेष पुण्यकारी माना गया है।

    Q4. भजन से क्या-क्या लाभ होते हैं?
    Ans: मानसिक शांति, आत्मिक बल, समाज में धर्म की प्रतिष्ठा और मोक्ष प्राप्ति।


    Conclusion

    "भजन पर उपकार को" हमें याद दिलाता है कि भक्ति मार्ग पर चलना केवल व्यक्तिगत मुक्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह समस्त संसार के कल्याण का मार्ग है। ऋषि, संत और भगतजन इसका साक्षात प्रमाण हैं।
    आइए, हम भी भजन का आश्रय लें और अपने जीवन को सच्चे अर्थों में सफल बनाएं।

    हरे कृष्णा! जय श्रीराम!

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