खाटू श्याम भजन

    याद थारी आवे रे लिरिक्स – मारवाड़ी भजन खाटू श्याम जी के लिए

    याद थारी आवे रे लिरिक्स – मारवाड़ी भजन खाटू श्याम जी के लिए

    "याद थारी आवे रे, घणो ही सतावे रे" – यह एक अत्यधिक भावुक और दिल को छू जाने वाला मारवाड़ी भजन है जो खाटू श्याम जी (सांवरिया सेठ) की भक्ति और विरह की गहरी भावना को व्यक्त करता है। इस भजन की तर्ज “उड़ जा काले कावा” से ली गई है, जो इसे और भी ज्यादा भावनात्मक और श्रद्धा से भरा बनाती है।

    इस भजन में भक्त का मन, श्याम बाबा की याद में तड़पता है और वह हर हाल में खाटू लौटने की इच्छा व्यक्त करता है। यह भजन प्रेम, भक्ति और आस्था का संपूर्ण रूप है।


    🎵 भजन के बोल – 'याद थारी आवे रे'

    तर्ज – उड़ जा काले कावा

    याद थारी आवे रे,
    घणो ही सतावे रे।।

    वापस कईया आऊँ सांवरा,
    जी ना लागे रे,
    पंछी बण बण हिवड़ो म्हारो,
    खाटू भागे रे,
    म्हारे मन में उठे हिलोरे,
    याद घणेरी आवे,
    कईया छोड़ के जाऊं सांवरा,
    मनड़ा कुण समझावे,
    याद थारी आवे रे,
    घणो ही सतावे रे।।

    म्हारे मन री पीड़ सांवरिया,
    थे ही जानो हो,
    कुण मन का काला कूण धोला,
    थे ही पछाणो हो,
    हे सांवल सरकार याद थारी,
    म्हाने क्यों तड़पावे
    आऊँ हंसता गाता नैना,
    जाता नीर बहावे,
    याद थारी आवे रे,
    घणो ही सतावे रे।।

    जद जद कसक उठे म्हारे मन में,
    खाटू दौड़्या आवा,
    बैठके थारी ड्योढ़ी ऊपर,
    सगली बात बातावा,
    कद सी करोला म्हारे मन री,
    इतना तो बतलाओ,
    जैयां मैं आश्यां थारे दर,
    म्हारे घर कदे आओ,
    याद थारी आवे रे,
    घणो ही सतावे रे।।

    रोए जद सेवकिया थारी,
    आख्यां भी भर आवे,
    मोटे मोटे नैना से,
    आंसूड़ा भी ढ़लकावे,
    ‘सोनू’ से थारी प्रीत सांवरिया,
    विरला ही कोई जाने,
    तेरो यो ‘सूर्यवंशी’ भी,
    थाने सब कुछ माने,
    याद थारी आवे रे,
    घणो ही सतावे रे।।


    🙏 FAQs – "याद थारी आवे रे" भजन से जुड़े प्रश्न

    यह भजन किस भगवान के लिए लिखा गया है?

    उत्तर: यह भजन खाटू श्याम जी (सांवरिया सेठ) के लिए लिखा गया है।

    भजन की तर्ज क्या है?

    उत्तर: इस भजन की तर्ज प्रसिद्ध गीत "उड़ जा काले कावा" से ली गई है।

    यह भजन किस भाषा में है?

    उत्तर: यह भजन पारंपरिक मारवाड़ी भाषा में लिखा गया है।

    इसे कौन गा सकता है?

    उत्तर: कोई भी भक्त जो श्याम बाबा की भक्ति करता है, इस भजन को श्रद्धा से गा सकता है।


    निष्कर्ष

    "याद थारी आवे रे" भजन श्याम प्रभु की भक्ति और उनके दर्शन की व्याकुलता को व्यक्त करता है। इस तरह के भजन हमारे दिल को अध्यात्म से जोड़ते हैं और हमें शांति का अहसास कराते हैं। श्याम बाबा के प्रति भक्तों की दीवानगी और प्रेम की भावनाओं को व्यक्त करने वाला यह भजन न केवल हमारी आस्था को बल देता है, बल्कि हमें अपने प्रभु के साथ एक गहरा मानसिक और आत्मिक संबंध भी स्थापित करता है।


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