मन तू सतसंग करले भाई भजन लिरिक्स
प्रकाशित: 04 Apr, 2025
Read Moreमन तू सतसंग करले भाई आधी मे पुनिआध,
तुलसी सतसंग साध कि भाई कटे कोटि अपराध,
मन तू सतसंग करले भाई,
सतसंग बीना सुख नही पावै,
चाहै फिरो जग माई......
सतसंग पारस है जग माई कंचन करै सदाई,
मन पलट हरि मे लागो सारो दुःख मिट जाई,
सतसंग है सत्य कि करणी भव से पार उतराई,
जो कोई आई बेटे सतसंग में प्रभु के दर्शन हो जाई,
सतसंग पाई सारा सुधरिया कबीरा सज्जन कसाई,
पल मे मोक्ष करे जीव कि यामे शिंष्य नाय,
देवा राम मिल्या गूरू पुरा सतसंग लगन लगाई,
गणपत राम करो नीत सतसंग जन्म सफल हो जाई.
सतसंग एक ऐसा अमूल्य रत्न है जो आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर देता है। हमारे संत, महात्मा, और धार्मिक शास्त्रों में सतसंग को सबसे प्रभावशाली साधन बताया गया है, जो व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकता है। आइए, इस ब्लॉग में हम समझते हैं कि सतसंग का हमारे जीवन में कितना महत्व है, और कैसे यह हमें बुराइयों से बचाकर एक सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
संत तुलसीदास जी के शब्दों में कहा गया है, "मन तू सतसंग करले भाई आधी में पुनिआध" अर्थात् यदि आप आधे समय भी सतसंग में बिताएंगे तो आपके जीवन के सभी पाप समाप्त हो सकते हैं। यहाँ संतों का यह संदेश है कि सतसंग से जुड़कर मनुष्य अपनी गलतियों और पापों को दूर कर सकता है और भगवान के मार्ग पर चल सकता है।
सतसंग बीना सुख नहीं पावै, चाहै फिरो जग माई
सतसंग के बिना जीवन में सुख की प्राप्ति संभव नहीं है, चाहे आप इस संसार में कहीं भी क्यों न रहो। जब हम सतसंग में बैठते हैं, तो हमारे दिल और दिमाग को शांति मिलती है, और हम अपने अंदर के तमाम दुखों और तनावों को छोड़ सकते हैं। सतसंग एक ऐसा अवसर है जहाँ हमें अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और भगवान से जुड़ने का मार्ग मिलता है।
सतसंग पारस है जग माई कंचन करै सदाई, मन पलट हरि में लागो सारो दुःख मिट जाई।
सतसंग की शक्ति इतनी प्रभावशाली है कि यह हमें परमात्मा से जोड़कर हमारे सभी दुःखों को समाप्त कर देता है। जैसे पारस (धातु) छुआने से लोहा सोने में बदल जाता है, वैसे ही सतसंग में बैठकर व्यक्ति का जीवन भी परिवर्तित हो जाता है। सतसंग में भगवान के शब्द और भक्ति की शक्ति से मनुष्य के सारे दुख समाप्त हो जाते हैं और उसकी आत्मा शुद्ध होती है।
सतसंग है सत्य कि करणी भव से पार उतराई, जो कोई आई बेटे सतसंग में प्रभु के दर्शन हो जाई।
सतसंग के माध्यम से ही हम सत्य को जान पाते हैं और जीवन के भवसागर से पार उतर सकते हैं। यही वह मार्ग है, जो हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। प्रभु के दर्शन सतसंग के माध्यम से होते हैं और व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य पूरा होता है।
सतसंग पाई सारा सुधरिया कबीरा सज्जन कसाई, पल में मोक्ष करे जीव कि यामे शिंष्य नाय।
कबीर दास जी ने कहा था कि सतसंग से कोई भी व्यक्ति सुधार सकता है, चाहे वह कितना भी पापी क्यों न हो। सतसंग का असर इतना गहरा होता है कि यह एक ही क्षण में व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति करा सकता है। चाहे वह कसाई ही क्यों न हो, यदि वह सतसंग करता है, तो वह भी एक सज्जन बन जाता है।
देवा राम मिल्या गूरू पुरा सतसंग लगन लगाई, गणपत राम करो नीत सतसंग जन्म सफल हो जाई।
सतसंग के द्वारा ही हम भगवान के दर्शन प्राप्त कर सकते हैं और जीवन के उद्देश्य को पूरा कर सकते हैं। गुरु के सान्निध्य में प्राप्त सतसंग हमें सही मार्ग दिखाता है और हमारा जन्म सफल बना देता है। यह न केवल हमारे जीवन को सुधारता है, बल्कि हमें अपने वास्तविक स्वरूप को जानने की प्रेरणा भी देता है।
सतसंग हमारे जीवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह न केवल हमारे जीवन को सुधारने का कार्य करता है, बल्कि हमें आत्मज्ञान और परमात्मा के समीप भी ले जाता है। यदि हम अपने जीवन में सतसंग को नियमित रूप से अपनाते हैं, तो हम अपने दुखों से मुक्त हो सकते हैं और एक सफल जीवन जी सकते हैं। संत तुलसीदास जी और अन्य महान संतों की शिक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, हमें सतसंग के महत्व को समझना चाहिए और इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
"मन तू सतसंग करले भाई, आधी में पुनिआध" – यह संदेश हमें बताता है कि यदि हम आधे समय भी सतसंग में बिताते हैं, तो हमारे जीवन के पाप समाप्त हो सकते हैं और हम आत्मज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए, आज से ही अपनी दिनचर्या में सतसंग को शामिल करें और अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
Post Your Comment