Hariram Baba Ji Bhajan

    हरीराम जी रा पर्चा भारी भजन लिरिक्स – उदमी बघेला का लोकगीत

    हरीराम जी रा पर्चा भारी भजन लिरिक्स – उदमी बघेला का लोकगीत

    हरीराम जी रा पर्चा भारी - Udmi Baghela द्वारा एक लोकप्रिय लोकगीत

    हरीराम जी रा पर्चा भारी राजस्थान के लोक संगीत का एक जीवंत और भावपूर्ण गीत है, जिसे प्रसिद्ध गायक उदमी बघेला ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है। यह गीत राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था को बखूबी दर्शाता है।

    गीत का सार

    यह गीत हरीराम जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति से भरा है, जो तपस्वी बाबा और समाज में एकता व समानता के संदेश को लेकर आता है। गायक उदमी बघेला ने इस गीत के माध्यम से न केवल हरीराम जी की महिमा का वर्णन किया है, बल्कि गाँव झोरडो नगर के इतिहास और उसकी सांस्कृतिक परंपराओं को भी उजागर किया है।

    गीत की विशेषताएँ

    • धार्मिक आस्था: गीत में हरीराम जी के अवतार और उनकी भक्ति का गुणगान है।

    • सामाजिक संदेश: भेदभाव को मिटाने और सबमें एकता का संदेश।

    • सांस्कृतिक जश्न: शुक्ल भादवा के मेले, ढोल नगाड़े और त्योहारों का जीवंत चित्रण।

    • लोकगीत की मिठास: राजस्थान की देसी भाषा और लोकधुन का बेहतरीन मेल।

    कलाकार – उदमी बघेला

    उदमी बघेला राजस्थान के लोकप्रिय लोकगायक हैं, जो अपनी मधुर आवाज और पारंपरिक गीतों के लिए जाने जाते हैं। उनकी गायकी में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और लोकसंस्कृति की झलक साफ़ नजर आती है।


    गीत के बोल लिखित में - 

     

    हरीराम जी रा पर्चा भारी,
    बाबो बड़ो तपधारी है,
    गांव झोरडो नगर बसायों,
    जाने दुनिया सारी है।।


    ब्राह्मण कुल रो मान बढायो,
    है बजरंग अवतारी है,
    भेद भाव रो भ्रम मिटायो,
    जाने जग संसारी है।।


    नगर खारड़ा में बनयों देवरों,
    दूसरी धाम पूजाई है,
    दूर देसा रा आवे जात्रि,
    धोके नर और नारी है।।


    शुक्ल भादवा रो मेलों भरीजे,
    मेलों भरीजे भारी है,
    ढोल नगाड़ा डीजे बाजे,
    गूंजे जय जय कारी है।।


    उदमी बाघेला ने पर्चा दीना,
    आवे दरगा थारी है,
    थारे नाम रा गुणीया गावे,
    गावे पर्चा भारी है।।


    हरीराम जी रा पर्चा भारी,
    बाबो बड़ो तपधारी है,
    गांव झोरडो नगर बसायों,
    जाने दुनिया सारी है।।

    यह गीत हर राजस्थान के दिल को छू जाता है, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम होता है।


    निष्कर्ष

    हरीराम जी रा पर्चा भारी गीत राजस्थान की लोकधरोहर को संजोने वाला एक अनमोल रत्न है। अगर आप राजस्थान की संस्कृति और लोकगीतों के शौकीन हैं, तो उदमी बघेला का यह गीत जरूर सुनें और अपनी संस्कृति से जुड़ाव महसूस करें।


    बिल्कुल! यहाँ "हरीराम जी रा पर्चा भारी" गीत के लिए कुछ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए हैं, जिन्हें आप ब्लॉग में शामिल कर सकते हैं:


    FAQs – हरीराम जी रा पर्चा भारी गीत के बारे में

    Q1: हरीराम जी रा पर्चा भारी गीत किसने गाया है?
    A: यह गीत प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगायक उदमी बघेला ने गाया है।

    Q2: इस गीत का मुख्य विषय क्या है?
    A: यह गीत हरीराम जी की महिमा और राजस्थान की सांस्कृतिक एकता व भक्ति को दर्शाता है।

    Q3: गीत में "पर्चा भारी" का क्या अर्थ है?
    A: "पर्चा भारी" का मतलब है ‘गुणों से भरा हुआ’ या ‘बहुत प्रभावशाली’। यहाँ इसका तात्पर्य हरीराम जी के गुणों से है।

    Q4: यह गीत किस भाषा में है?
    A: यह गीत राजस्थानी भाषा में है, जो राजस्थान की लोक संस्कृति का हिस्सा है।

    Q5: उदमी बघेला कौन हैं?
    A: उदमी बघेला राजस्थान के एक लोकप्रिय लोकगायक हैं, जो पारंपरिक राजस्थानी गीतों के लिए जाने जाते हैं।

    Q6: इस गीत में किन प्रमुख सांस्कृतिक तत्वों का जिक्र है?
    A: गीत में राजस्थानी त्योहार, मेलों, ढोल नगाड़े, और सामाजिक एकता जैसे तत्व शामिल हैं।

    Q7: क्या इस गीत को किसी विशेष त्योहार या मेले में गाया जाता है?
    A: हाँ, यह गीत अक्सर राजस्थान के लोक त्योहारों और मेलों में बजाया जाता है, खासकर शुक्ल भादवा के मेले में।

    Q8: इस गीत को कहाँ से सुन सकते हैं?
    A: आप इसे YouTube, राजस्थानी लोक संगीत प्लेटफॉर्म्स और अन्य म्यूजिक ऐप्स पर सुन सकते हैं।


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